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कर्नाटक के चुनाव की ABCD
Wed, 25 Apr 2018
चुनाव कोई भी हो बिना जातिगत गणित के उसका समीकरण हल नहीं होता , लेकिन हैरानी की बात तो है की ज्यादातर राजनैतिक दल अपने आपको जाति -पाँति से दूर और धर्म निरपेक्ष बताते हैं। लेकिन चुनो के दौरान टिकट वितरण की शुरुआत भी होती जाति और धर्म के आंकड़ों से है। कर्नाटक के चुनावों का भी यही गणित है। जहाँ जाति और धर्म के आधार पर तमाम राजनैतिक दल चुनावी समर में अपनी गोटियां बैठाने में लगे हैं। ऐसे में चाहे भारतीय जनता पार्टी हो या कांग्रेस या फिर कोई अन्य दल या निर्दलीय। ऐसे में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया हों या फिर भाजपा के cm उम्मीदवार येदुरप्पा सभी अपने -अपने गढ़ में वोटरों की दुखती नब्ज़ टटोल कर सत्ता की सीढियाँ चढने की कोशिश में हैं। येदुरप्पा जहाँ लिंगायतों का अपने आपको सबसे बड़ा चिंतक बताने की कोशिश कर रहे हैं , क्योंकि वो इसी समुदाय से आते हैं। उधर सिद्धारमैया लिंगायतों को अल्पसंख्यक का दर्ज़ा दिलाने की अपनी पूर्व में की गयी कोशिश ध्यान दिलाते हुए लुभाने की कोशिश में हैं। ऐसे में विकास और राज्य हित की बातें पीछे छूट गयी हैं। शायद मतदाता भी उन बातों को भूल गए हैं।