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POLITICAL
तो क्या ग्लोबल वार्मिंग सत्र भी चलेगा
Wed, 2 May 2018
दुनियाभर में अनाप सनाप फ़ैल रहे प्रदूषण ने पर्यावरण में ज़हर घोल दिया है। आलम यह है की हवा में सांस लेना भी कई जगह डोभर हो जाता। बेमौसम बरसात ,जब तब ओलावृष्टि, अंधाधुंध धूल भरी आँधियाँ , हिमपात , सुनामी और भी तमाम प्राकृतिक आपदाएं इसी प्रदूषण की देन हैं। फिर बह हम नहीं सुधर रहे अगर रहा तो एक दिन मौसम का चक्र ऐसा ख़राब होगा की देश में पता ही नहीं चलेगा की कब गर्मी आयी और कब बरसात और सर्दी। ऐसे में फसलों की पैदाबार तो प्रभावित होगी ही साथ कई खाद्यान्न तो अनुकूल मौसम न मिलने से पैदा ही नहीं होंगे। क्या हमें उसी संकट की घडी का इंतेज़ार है ? हमारे नेताओं को भी उस दिन का इंतज़ार है जब सदनों में शीतकालीन सत्र और मानसून सत्र की तरह ग्लोबल वार्मिंग सत्र भी चलेगा ? प्रदूषण पर लगाम हम सबको मिलकर लगानी ही होगी नहीं तो भयंकर इसके दुष्परिणामों से कोई नहीं बचा सकता।